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व्यायाम से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा 8-12% तक कम, अब इलाज सिर्फ कीमोथेरेपी नहीं: डॉ. प्रांजिल मंडलोई
ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ विशेष
ASCO 2026 में व्यायाम और वजन नियंत्रण पर जोर; इम्यूनोथेरेपी, ADC और ब्लड टेस्ट से इलाज हो रहा है ज्यादा व्यक्तिगत
इंदौर। अक्टूबर का महीना दुनिया भर में ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2026 की थीम है “हर कहानी अनोखी है, हर सफर मायने रखता है” (Every Story is Unique, Every Journey Matters)। इसका उद्देश्य ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ समय पर पहचान, सही जांच और हर महिला के लिए व्यक्तिगत उपचार के महत्व को सामने लाना है।
इसी अवसर पर मेदांता हॉस्पिटल इंदौर के कंसल्टेंट, मेडिकल ऑन्कोलॉजी (कैंसर केयर), डॉ. प्रांजिल मंडलोई ने ब्रेस्ट कैंसर की स्क्रीनिंग और उपचार में हो रहे महत्वपूर्ण बदलावों की जानकारी साझा की।
नियमित व्यायाम: बचाव में अहम भूमिका
डॉ. मंडलोई के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधि ब्रेस्ट कैंसर से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विभिन्न अध्ययनों में नियमित व्यायाम करने वाली महिलाओं में निष्क्रिय महिलाओं की तुलना में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा लगभग 8 से 12 प्रतिशत तक कम देखा गया है। इसके अलावा व्यायाम वजन नियंत्रण, हार्मोनल और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य तथा हृदय की सेहत के लिए भी लाभकारी है।
अमेरिकन सोसाइटी ऑफ क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी 2026: व्यायाम और वजन नियंत्रण पर खास जोर
दुनिया की सबसे बड़ी कैंसर बैठकों में से एक, अमेरिकन सोसाइटी ऑफ क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी (ASCO) की वार्षिक बैठक 29 मई से 2 जून 2026 तक शिकागो, अमेरिका में हुई। इसमें कैंसर उपचार से लेकर लाइफस्टाइल और सर्वाइवरशिप तक के नए शोध प्रस्तुत किए गए।
- DEDiCa अध्ययन: ब्रेस्ट कैंसर के बाद मेडिटेरेनियन डाइट के साथ रोजाना लगभग 30 मिनट अतिरिक्त तेज चलने जैसे सरल बदलाव से वजन और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य में सुधार दिखा। कैंसर दोबारा होने के संबंध में भी उत्साहजनक संकेत मिले, हालांकि इसके लिए और प्रमाण की जरूरत है।
- BWEL अध्ययन: अधिक वजन या मोटापे वाली ब्रेस्ट कैंसर मरीजों में व्यवस्थित वजन घटाने के कार्यक्रम से शारीरिक क्षमता, थकान और जीवन की गुणवत्ता में सुधार देखा गया।
इसलिए इलाज के बाद भी नियमित व्यायाम, स्वस्थ भोजन और जरूरत होने पर नियंत्रित रूप से वजन घटाना सर्वाइवरशिप केयर का अहम हिस्सा होना चाहिए।
GLP-1 दवाओं पर नई रिसर्च: ASCO 2026 में सेमाग्लूटाइड जैसी GLP-1 दवाओं पर भी अहम ऑब्जर्वेशनल डेटा आया। कुछ अध्ययनों में इन्हें लेने वाली मरीजों में बीमारी के बढ़ने और मृत्यु के जोखिम में कमी के संकेत मिले। लेकिन अभी यह प्रमाणित नहीं है कि ये दवाएं खुद कैंसर की पुनरावृत्ति रोकती हैं। इसलिए फिलहाल इनका उपयोग मोटापे या डायबिटीज जैसे स्थापित चिकित्सकीय कारणों के लिए ही होना चाहिए, कैंसर रोकने वाली दवा के रूप में नहीं।
स्क्रीनिंग: जल्दी पहचान सबसे जरूरी
डॉ. मंडलोई के अनुसार बेहतर इलाज का सबसे महत्वपूर्ण आधार बीमारी की समय पर पहचान है। सामान्य जोखिम वाली महिलाओं को लगभग 40 वर्ष की उम्र से मैमोग्राफी स्क्रीनिंग के बारे में अपने चिकित्सक से चर्चा करनी चाहिए। परिवार में ब्रेस्ट या ओवरी कैंसर का इतिहास, BRCA म्यूटेशन या अन्य उच्च जोखिम कारक होने पर स्क्रीनिंग कम उम्र से शुरू करनी पड़ सकती है।
HR पॉजिटिव: हर मरीज को कीमोथेरेपी जरूरी नहीं
ब्रेस्ट कैंसर का सबसे सामान्य प्रकार हॉर्मोन रिसेप्टर पॉजिटिव (HR-positive) है। आज ट्यूमर की बायोलॉजी, लिम्फ नोड की स्थिति और जरूरत पड़ने पर जीनोमिक टेस्ट की मदद से यह तय किया जा सकता है कि शुरुआती HR पॉजिटिव कैंसर में कीमोथेरेपी से वास्तविक लाभ मिलेगा या सिर्फ हॉर्मोन थेरेपी काफी होगी। इससे कई कम जोखिम वाले मरीज अनावश्यक कीमोथेरेपी और उसके साइड इफेक्ट्स से बच सकते हैं।
मेटास्टेटिक HR पॉजिटिव ब्रेस्ट कैंसर में भी आधुनिक हॉर्मोनल थेरेपी और CDK4/6 इन्हिबिटर्स की मदद से कई मरीजों में बीमारी को लंबे समय तक नियंत्रित रखना संभव हो रहा है।
ब्लड टेस्ट से निगरानी: ESR1 म्यूटेशन
एडवांस्ड HR पॉजिटिव, HER2 नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर में ESR1 म्यूटेशन टेस्टिंग एक अहम नई तकनीक के रूप में सामने आई है। हॉर्मोन थेरेपी के दौरान कुछ मरीजों में यह म्यूटेशन विकसित हो सकता है, जो संकेत देता है कि कैंसर मौजूदा हॉर्मोनल इलाज के प्रति प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) बना रहा है।
नई ct DNA या लिक्विड बायोप्सी तकनीक से कई बार यह म्यूटेशन सीटी स्कैन में बीमारी बढ़ती दिखने से पहले ही खून में पकड़ा जा सकता है। हाल के अध्ययनों में नियमित अंतराल पर निगरानी और म्यूटेशन मिलने पर स्कैन में प्रगति दिखने से पहले ही इलाज बदलने से बीमारी को अधिक समय तक नियंत्रित रखने का लाभ देखा गया है।
यह जांच खासतौर पर एडवांस्ड HR पॉजिटिव/HER2 नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर के लिए है। यह सभी शुरुआती ब्रेस्ट कैंसर मरीजों के लिए रूटीन पुनरावृत्ति जांच नहीं है।
ट्रिपल नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर: इम्यूनोथेरेपी से नई उम्मीद
ट्रिपल नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर (TNBC) अपेक्षाकृत अधिक आक्रामक प्रकार है। अन्य प्रमुख प्रकारों की तुलना में इसमें दोबारा होने का खतरा अधिक और कुल सर्वाइवल सामान्यतः कम रहता है। लेकिन अब इसके इलाज में बड़े बदलाव आए हैं।
- शुरुआती हाई-रिस्क TNBC: पेम्ब्रोलिजुमैब इम्यूनोथेरेपी अब कीमोथेरेपी के साथ इलाज का स्थापित हिस्सा बन चुकी है। इससे पुनरावृत्ति और सर्वाइवल के नतीजों में सुधार देखा गया है।
- मेटास्टेटिक TNBC: चुनिंदा मरीजों में, खासकर PD-L1 पॉजिटिव बीमारी में, पेम्ब्रोलिजुमैब आधारित इलाज एक महत्वपूर्ण विकल्प है।
ADC: सीधे कैंसर सेल तक दवा
एंटीबॉडी ड्रग कॉन्जुगेट (ADC) ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में तेजी से महत्वपूर्ण हो रहे हैं। इस तकनीक में एक एंटीबॉडी को शक्तिशाली कैंसर-रोधी दवा से जोड़ा जाता है। एंटीबॉडी कैंसर सेल के लक्ष्य को पहचानकर उससेजुड़ती है और दवा को मुख्य रूप से ट्यूमर तक पहुंचाने में मदद करती है।
TNBC में सैसिटुजुमैब गोविटेकन जैसे ADC ने मेटास्टेटिक बीमारी में सर्वाइवल बेहतर किया है। ADC और इम्यूनोथेरेपी के कॉम्बिनेशन पर भी तेजी से शोध आगे बढ़ रहा है।
HER2 पॉजिटिव कैंसर: बदले हुए नतीजे
HER2 पॉजिटिव ब्रेस्ट कैंसर कभी सबसे आक्रामक प्रकारों में गिना जाता था, लेकिन आधुनिक HER2-टार्गेटेड थेरेपी ने इसके नतीजे काफी बदल दिए हैं।
- ट्रैस्टुजुमैब डेरक्सटेकन (Enhertu): यह एक आधुनिक ADC है, जिसने मेटास्टेटिक HER2 पॉजिटिव कैंसर में बीमारी को लंबे समय तक नियंत्रित रखने के साथ कुल सर्वाइवल में भी अहम सुधार दिखाया है। अब यह इलाज की श्रृंखला में बेहद महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
- टुकाटिनिब (Tucatinib): यह ओरल टार्गेटेड दवा ट्रैस्टुजुमैब और कैपेसिटाबिन के साथ देने पर प्रोग्रेशन-फ्री और ओवरऑल सर्वाइवल दोनों में सुधार दिखा चुकी है। इसकी खासियत यह है कि ब्रेन मेटास्टेसिस वाले मरीजों में भी इसका सार्थक लाभ देखा गया है, जो HER2 पॉजिटिव बीमारी की एक बड़ी चुनौती रही है।
इन दवाओं की वजह से मेटास्टेटिक HER2 पॉजिटिव ब्रेस्ट कैंसर के कई मरीज अब पहले की तुलना में काफी लंबे समय तक बेहतर जीवन गुणवत्ता के साथ जी पा रहे हैं।
अब इलाज सिर्फ कीमोथेरेपी नहीं
डॉ. मंडलोई के अनुसार आज ब्रेस्ट कैंसर का उपचार केवल कीमोथेरेपी तक सीमित नहीं है। हर मरीज के ट्यूमर की बायोलॉजी के आधार पर हॉर्मोन थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी, ADC और लिक्विड बायोप्सी आधारित निगरानी जैसे विकल्प उपलब्ध हो रहे हैं। इलाज जितना व्यक्तिगत होता जा रहा है, उतना ही सही सबटाइप और मॉलिक्यूलर विशेषताओं की पहचान जरूरी होती जा रही है।
डॉ. मंडलोई का संदेश
नियमित व्यायाम करें, स्वस्थ वजन बनाए रखें, स्क्रीनिंग को नजरअंदाज न करें और ब्रेस्ट कैंसर होने पर उसके सही सबटाइप की जानकारी जरूर लें। आज जल्दी पहचान होने पर बड़ी संख्या में मरीज पूरी तरह ठीक हो सकते हैं, जबकि एडवांस्ड ब्रेस्ट कैंसर में भी आधुनिक इलाज से बीमारी को कई वर्षों तक नियंत्रित रखना संभव हो रहा है।
ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ का उद्देश्य केवल बीमारी की बात करना नहीं, बल्कि महिलाओं को समय पर जांच, वैज्ञानिक जानकारी और सही उपचार तक पहुंचने के लिए प्रेरित करना है।


